Last alfaj

हिज़्र की वो आखिरी निशानी भी खोने वाली है

सदियों से सुखी आंखे अब खुल के रोने वाली है

मांगी थीं दो दुआएं खुदा से के या तो तू मिल जाए या ये मौत आ जाए

तू तो नहीं मिला खैर,जल्दी ही दूसरी दुआ कुबूल होने वाली है

मोहब्बत के आखिरी पड़ाव पर आ रहा हूं

मैं हर शायरी में तेरा नाम लिख कर जा रहा हूं

≈ 𝓓𝓲𝓼𝓱𝓾



Posted Apr 15, 2025, 7:37 PM UTC

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