यादों का जनाज़ा
ख्वाहिशों का बोझ ढोते-ढोते, यादों का बोझ ढोने लगा,
यादें जब वक़्त की क़ब्र में सो गईं, तो उनके जनाज़े का बोझ ढोने लगा।
तेरे ख़ातिर सबसे लड़ लिया, की हर अपने से जंग,
जब तू तोड़ गई मेरे दिल की रीढ़,टूटे दिल से तानों का बोझ ढोने लगा।
जब भी रात गहरी हुई, मेरा अकेलापन मुझे याद आया,
बहादी उम्मीदों में आँसू,पानी आँखों से तेरा नाम धोने लगा।
Posted Jul 2, 2025, 3:21 PM UTC
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