मुंशी प्रेमचंद और लिखने की कला

स्वरचित

मुंशी प्रेमचंद जी कितना सुंदर लिखते है। इंसानी स्वभाव व वृत्ति की जटिलता को कितने सहज तरीके से प्रस्तुत करते है और वो कहानी में इतनी अच्छी तरह पैठ जाते है कि एक अलग ही मज़ा आता है पढ़ने में। ये ऐसा मज़ा है जो धीरे धीरे अभिव्यक्त होता है।

एक तरफ वो एक गांव के साहूकार की किसानों के प्रति निर्ममता दिखाते है और दूसरे ही पल उस निर्ममता को इंसानी कमी और सामाजिक कुरीति बताकर कुंद कर देते है।

एक तरफ वो एक गरीब किसान, जो किस्मत से बूरी तरह से पीटा गया है, उसकी करुण स्थिति का वर्णन करते है और हमे भावुक कर देते हैं; और दूसरी ओर वे उसी किसान द्वारा अपनी पत्नी की बूरी तरह से पिटाई करती तस्वीर खींचते है।

इंसानी स्वभाव होता ही जटिल है, पर हमे जो इंसानी स्वभाव परोसा जाता है वो बहुत ही सीधा साधारण सा होता है। क्योंकि ऐसा समझा जाता है कि हम शायद इंसानी स्वभाव को समझ नहीं सकेंगे। और व्यवहार में चीज़ों को जितनी सीधी राखी जाती है उतना ही अच्छा होता है।

किसी इंसानी किरदार के साथ न्याय कैसे किया जाता है ये तो मुंशी प्रेमचंद से ही सीखना चाहिए। कृतज्ञ हूँ मै की ऐसे देश में जन्म लिया है जहां मुंशी प्रेमचंद जैसे लेखक पैदा हुए है। 🙏🙏🙏

Posted Aug 8, 2025, 4:54 PM UTC

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