चाय पर कविता
रसोई से जब खुशबू आए,
शाम हल्की मुस्काए,
दो कप लेकर दीदी आए,
मुझको पास बिठाए।
संग-संग बैठें हम दोनों,
धीरे-धीरे चाय पिएँ,
घूँटों में घुलती हँसी हमारी,
मन की बातें कहें-सुनें।
छोटी थकानें,
पल में दूर चली जाएँ,
मैं और दीदी की ये चाय,
रिश्ते और गहरे बनाए।
Posted Mar 1, 2026, 2:26 PM UTC
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