Heatwave 2026: हीट स्ट्रोक और ‘समर वायरल’ से कैसे बचें? जानें उपाय

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मई 2026 की झुलसा देने वाली गर्मी ने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया है. तापमान 45 डिग्री के पार जा चुका है और आसमान से मानो आग बरस रही है. इस भीषण ‘हीटवेव’ (Heatwave) का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ रहा है. अस्पतालों की ओपीडी (OPD) हीट स्ट्रोक, फ़ूड पॉइज़निंग और अजीबोगरीब ‘समर वायरल’ के मरीज़ों से भरी हुई है.

गर्मी के इस जानलेवा प्रकोप से ख़ुद को और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखें? इस अहम विषय पर हमने विशेषज्ञों—डॉ. पंकज खटाना (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स) और डॉ. नमिता जग्गी (चेयरपर्सन- लैब सर्विसेज़ और इंफ़ेक्शन कंट्रोल, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स) से बात की. आइए जानते हैं हीटवेव से बचाव के उपाय जो विशेषज्ञों ने बताए.

हीट एग्ज़ॉर्शन बनाम हीट स्ट्रोक: कैसे पहचानें फ़र्क?

अक्सर लोग गर्मी से होने वाली आम थकान और जानलेवा ‘हीट स्ट्रोक’ के बीच फ़र्क नहीं समझ पाते. डॉ. पंकज खटाना ने इन दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट किया है:

  • हीट एग्ज़ॉर्शन (Heat Exhaustion): इसमें व्यक्ति को भारी थकान, चक्कर आना, उल्टी, मांसपेशियों में ऐंठन और बहुत ज़्यादा पसीना आता है. त्वचा ठंडी और गीली महसूस होती है और शरीर का तापमान 40°C से कम रहता है.
  • हीट स्ट्रोक (Heat Stroke – जानलेवा स्थिति): यह एक मेडिकल इमरजेंसी है. शरीर का तापमान 40°C या उससे ऊपर चला जाता है. सबसे बड़ी पहचान यह है कि पसीना आना बंद हो जाता है, त्वचा सूखी, लाल और गर्म हो जाती है. व्यक्ति बेहोश हो सकता है, उसे दौरे पड़ सकते हैं या वह कोमा में जा सकता है.

ऐसे में तुरंत क्या करना चाहिए? 

व्यक्ति को तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर लिटाएं और कपड़े ढीले कर दें. सिर, गर्दन और कांख (Underarms) पर ठंडी पट्टियां या आइस पैक रखें. अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे ओआरएस (ORS) या ठंडा पानी पिलाएं. पसीना बंद होने और बेहोशी की हालत में बिना एक मिनट गंवाए सीधे अस्पताल ले जाएं.

ज़्यादा पानी पीना भी बन सकता है ‘ज़हर’

गर्मियों में अक्सर कहा जाता है कि खूब पानी पिएं, लेकिन क्या हद से ज़्यादा पानी पीना भी ख़तरनाक हो सकता है?

डॉ. खटाना बताते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा सादा पानी पीने से शरीर में ‘हाइपोनेट्रेमिया’ (Hyponatremia) की स्थिति पैदा हो सकती है. इसका मतलब है खून में सोडियम का स्तर तेज़ी से गिर जाना, जिससे सिरदर्द, उलझन और दौरे तक पड़ सकते हैं. बिना ज़रूरत बहुत ज़्यादा स्पोर्ट्स ड्रिंक्स पीना भी इलेक्ट्रोलाइट्स को बिगाड़ देता है.

क्या है सही तरीक़ा?  

प्यास के अनुसार दिन भर में 2.5 से 3.5 लीटर पानी पिएं.

  • अगर बहुत पसीना आ रहा है, तो 1 लीटर पानी में ORS का 1 पाउच घोलकर पिएं.
  • घर पर घोल बनाने के लिए: 1 लीटर पानी + आधा छोटा चम्मच नमक + 6 चम्मच चीनी मिलाएं.
  • नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी बेहतरीन विकल्प हैं. एक बार में 1 लीटर से ज़्यादा पानी गट-गट करके न पिएं.

पुरानी बीमारियों वाले मरीज़ रहें ज़्यादा सावधान

हाई बीपी, डायबिटीज़ और हृदय रोगियों के लिए यह गर्मी किसी बुरे सपने से कम नहीं है. डॉ. खटाना चेतावनी देते हैं: “गर्मी के कारण रक्त वाहिकाएं (Blood vessels) फैलती हैं, जिससे बीपी अनियंत्रित हो सकता है. डिहाइड्रेशन के कारण खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है.”

डॉक्टर की सलाह: अपनी दवाओं की डोज़ (Dose) ख़ुद न बदलें. दोपहर में बाहर निकलने से बचें और नमक का सेवन कम करें.

दूषित पानी और फ़ूड पॉइज़निंग का बढ़ता ग्राफ़

गर्मी में पानी की क़िल्लत के कारण लोग अक्सर असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हो जाते हैं.

डॉ. नमिता जग्गी बताती हैं: “दूषित पानी पीने से टाइफाइड, हैजा (Cholera) और पीलिया (Jaundice) का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है. हमेशा अपनी पर्सनल पानी की बोतल साथ रखें. बाहर मिलने वाले खुले जूस, कटे हुए फल या बर्फ़ का सेवन बिल्कुल न करें.”

मई-जून की गर्मी बैक्टीरिया पनपने के लिए सबसे ‘आइडियल’ मौसम है. खाना बहुत तेज़ी से ख़राब होता है. डॉ. जग्गी की सलाह है कि हमेशा ताज़ा खाना बनाएं और खाएं. अगर खाना बच जाए, तो उसे तुरंत सही तापमान पर फ़्रिज (Fridge) में रखें. बाहर का जंक फ़ूड खाने से बचें.

एसी (AC) और ‘समर वायरल’ का खेल

आजकल लोग एक अजीब से ‘समर वायरल’ की चपेट में आ रहे हैं, जिसमें तेज़ बुख़ार, सिरदर्द और गले में ख़राश होती है. क्या इसका कारण एयर कंडीशनर (AC) है?

डॉ. नमिता जग्गी इस ‘सर्द-गर्म’ वाले मिथक को विज्ञान से जोड़कर समझाती हैं: “जब आप ठंडे एसी वाले कमरे से अचानक 45 डिग्री की चिलचिलाती धूप में जाते हैं (या इसके उलट करते हैं), तो आपके शरीर को तापमान एडजस्ट करने में बहुत मुश्किल होती है. इससे शरीर पर भारी दबाव पड़ता है, जिसके कारण सिरदर्द, कमज़ोरी और बुख़ार महसूस होता है.”

बचाव: एसी से बाहर निकलने के बाद कुछ मिनट नॉर्मल तापमान (पंखे के नीचे) में रुकें और फिर धूप में जाएं. इसी तरह, बाहर से पसीने में आने के तुरंत बाद एसी में न बैठें; पहले शरीर का तापमान सामान्य होने दें. हीटवेव से बचाव के तरीक़ों की जानकारी रखें.

बेमौसम बारिश और मच्छरों का बढ़ता ख़तरा

क्लाइमेट चेंज के कारण अब मई की भीषण गर्मी के बीच अचानक बारिश भी होने लगी है. डॉ. जग्गी आगाह करती हैं कि यह स्थिति मच्छरों को पनपने का पूरा मौक़ा दे रही है. पहले डेंगू और मलेरिया मानसून में फैलते थे, लेकिन अब यह पैटर्न बदल गया है. अपने घर के आस-पास, टंकियों और कूलर में पानी बिलकुल जमा न होने दें.

हीटवेव से बचाव कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस थोड़ी सी सजगता और सही जानकारी की ज़रूरत है. धूप में बेवजह न निकलें, ढीले कपड़े पहनें, और अगर तबियत बिगड़े तो घरेलू नुस्ख़ों के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. आपकी एक छोटी सी समझदारी आपकी जान बचा सकती है.

Posted May 28, 2026, 10:50 AM UTC

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