पूर्ण संत रामपाल जी महाराज कबीर, सतगुरु शरण में आने से, आई टले बलाय। जै मस्तिक में सूली हो वह कांटे में टल जाय।। सतगुरु अर्थात् तत्वदर्शी संत से उपदेश लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने से प्रारब्ध कर्म के पाप अनुसार यदि भाग्य में सजाए मौत हो तो वह पाप कर्म हल्का होकर सामने आएगा। उस साधक को कांटा लग

Posted Jun 3, 2026, 1:25 PM UTC
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