अपने ही देश में बेघर, हिमाचल के लाखों परिवारों की दर्द भरी दास्तान
हिमाचल प्रदेश में लाखों परिवार सरकारी और वन भूमि पर पीढ़ियों से रह रहे हैं। 2002 में तत्कालीन सरकार ने इन कब्जों को नियमित करने की नीति बनाई थी, जिसके तहत लाखों आवेदन आए। हिमाचल उच्च न्यायालय ने इस पूरी नीति को असंवैधानिक घोषित कर दिया और सभी कब्जे हटाने का आदेश दिया। समस्या की जड़ यह है कि हिमाचल की अधिकांश ज़मीन वन भूमि के रूप में दर्ज है जिसे केंद्र की मंजूरी के बिना नियमित नहीं किया जा सकता। लाखों परिवार कानून, अदालत और सरकार के बीच अनिश्चितता में जी रहे हैं।
Posted Jun 17, 2026, 1:20 PM UTC
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