न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 मे, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब मे खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप मे सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था। प्रमाण: ऋग्वेद मण्डल 10, सूक्त 4, मंत्र 3 जिसमे

Posted Jun 27, 2026, 7:32 AM UTC
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