नींद
अब नींद नहीं आती है,
आते हैं तो बस सपने उसके।
उन सपनों में मानो इक नई सी दुनिया है,
जो सिर्फ मेरी है और उसकी है।
नींद नहीं है आँखों में पर ये बेईमान
खुलना नहीं चाहती है,
यह सपनो को स्वीकार कडुवेपन पर
और बस जीवन में अब लौटना नहीं चहती है।
क्योंकि,
अब इन्हें नींद नहीं आती है।
- विवि
( यह मेरी दूसरी कविता है मुझे और बढ़ोतरी के लिए निर्देश दे सके तो सहायता कीजिएगा)
Posted Jul 10, 2026, 7:29 PM UTC
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